Latest Post

हज़रत बहलोल दाना (मज्ज़ूब) और शैख़ जुनैद बग़्दादी रहमतुल्लाह अलैहि कि बेहतरीन मुलाक़ात और हैरतअंगेज़ ग़ुफ्तुगू


Buzurgan e Deen Ki Karamat or Wakeyaat, guftagu ka saleeqa, Hazrat Behlol Dana Aur Junaid Baghdadi Ki Mulaqat aur Hairat Angez Guftagu, islamic stories, khana khane ka sahi tarika, sone ka sahi tarika,
एक बार शेख़ जुनैद बग़्दादी सफ़र के इरादे से बग़दाद रवाना हुए । हज़रत-ए-शैख़ के कुछ मुरीद साथ थे । शेख़ ने मुरीदों से पूछा: "तुम लोगों को बहलोल का हाल मालूम है?"
लोगों ने कहा: " हज़रत! वो तो एक दीवाना है । आप उससे मिलकर क्या करेंगे?"
शेख़ ने जवाब दिया: "ज़रा बहलोल को तलाश करो । मुझे उससे काम है ।" मुरीदों ने शेख़ के हुक्म की तामील अपने लिए सआदत समझी । थोड़ी जुस्तजू के बाद एक सहरा में बहलोल को ढूंढ निकाला और शेख़ को अपने साथ लेकर वहाँ पहुंचे । शेख़, बहलोल के सामने गए तो देखा कि बहलोल सर के नीचे एक ईंट रखे हुए दराज़ हैं ।

शेख़ ने सलाम किया तो बहलोल ने जवाब दे कर पूछा: "तुम कौन हो?"
"मैं जुनैद बग़्दादी हूँ ।

"तो ऎ अबु-अल-क़ासिम! तुम ही वो शेख़ बग़्दादी हो जो लोगों को बुज़ुर्गों की बातें सिखाते हो?"
"जी हाँ, कोशिश तो करता हूँ ।"

"अच्छा तो तुम अपने खाने का तरीक़ा तो जानते ही होंगे?"
"क्यों नहीं, बिस्मिल्लाह पढ़ता हूँ, और अपने सामने की चीज़ खाता हूँ, छोटा निवाला बनाता हूँ, आहिस्ता-आहिस्ता चबाता हूँ, दूसरों के निवालों पर नज़र नहीं डालता और खाना खाते वक़्त अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल नहीं होता ।" फिर दुबारा कहा: "जो लुक़मा भी खाता हूँ, अल्हम्दुलिल्लाह कहता हूँ । खाना शुरू करने से पहले हाथ धोता हूँ और फ़ारिग़ होने के बाद भी हाथ धोता हूँ ।"

ये सुन कर बहलोल उठ खड़े हुए और अपना दामन शेख़ जुनैद की तरफ़ झटक दिया । फिर उनसे कहा: "तुम इंसानों के पीर मुर्शिद बनना चाहते हो और हाल ये है कि अब तक खाने पीने का तरीक़ा भी नहीं जानते ।" ये कह कर बहलोल ने अपना रास्ता लिया । शेख़ के मुरीदों ने कहा: "या हज़रत! ये शख़्स तो दीवाना है ।"
"हाँ! दीवाना तो है, मगर अपने काम के लिए होशयारों के भी कान काटता है । इस से सच्ची बात सुनना चाहिए । आओ, इसके पीछे चलें । मुझे उससे काम है ।"बहलोल एक वीराने में पहुँच कर एक जगह बैठ गए ।

शेख़ बग़्दादी उनके पास पहुँचे तो उन्होंने शेख़ से फिर ये सवाल किया: "कौन हो तुम?"
"मैं हूँ बग़्दादी शेख़! जो खाना खाने का तरीक़ा नहीं जानता ।"

बहलोल ने कहा: "ख़ैर तुम खाना खाने के आदाब से नावाक़िफ़ हो तो गुफ़्तगु का तरीक़ा जानते ही होंगे?"
शेख़ ने जवाब दिया: "जी हाँ जानता तो हूँ ।"

"तो बताओ, किस तरह बात करते हो?"
"मैं हर बात एक अंदाज़े के मुताबिक़ करता हूँ । बे मौक़ा और बेहिसाब नहीं बोले जाता, सुनने वालों की समझ का अंदाज़ा कर के ख़ल्क़-ए-ख़ुदा को अल्लाह और रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के अहकाम की तरफ़ तवज्जा दिलाता हूँ । ये ख़्याल रखता हूँ कि इतनी बातें न कहूं कि लोग मुझ से बेज़ार हो जाएं । बातिनी और ज़ाहिरी उलूम के नुक्ते, नज़र में रखता हूँ ।" इस के साथ गुफ़्तगु के आदाब से मुताल्लिक़ कुछ और बातें भी बयान कीं ।

बहलोल ने कहा: "खाना खाने के आदाब तो एक तरफ़ रहे । तुम्हें तो बात करने का ढंग भी नहीं आता ।" फिर शेख़ से मुँह फेरा और एक तरफ़ चल दिए । मुरीदों से ख़ामोश न रहा गया ।
उन्होंने कहा: "या हज़रत! ये शख़्स तो दीवाना है । आप दीवाने से भला क्या तवक़्क़ो रखते हैं?" "भई! मुझे तो इस से काम है । तुम लोग नहीं समझ सकते ।" इसके बाद शेख़ ने फिर बहलोल का पीछा किया ।

बहलोल ने मुड़कर देखा और कहा: "तुम्हें खाना खाने और बात करने के आदाब नहीं मालूम हैं । सोने का तरीक़ा तो तुम्हें मालूम ही होगा?"
शेख़ ने कहा: "जी हाँ! मालूम है ।"

"अच्छा बताओ, तुम किस तरह सोते हो?"
"जब में इशा की नमाज़ और दरूद-ओ-वज़ाइफ़ से फ़ारिग़ होता हूँ तो सोने के कमरे में चला जाता हूँ ।" ये कह कर शेख़ ने सोने के वो आदाब बयान किए जो उन्हें बुज़ुर्गान-ए-दीन की तालीम से हासिल हुए थे ।

बहलोल ने कहा: "मालूम हुआ कि तुम सोने के आदाब भी नहीं जानते ।" ये कह कर बहलोल ने जाना चाहा तो हज़रत जुनैद बग़्दादी ने उनका दामन पकड़ लिया और कहा: "ऎ हज़रत! मैं नहीं जानता । अल्लाह के वास्ते तुम मुझे सिखा दो ।"
[ads-post]
कुछ देर बाद बहलोल ने कहा: "मियाँ! ये जितनी बातें तुमने कहीं, सब बाद की चीज़ें हैं । असल बात मुझसे सुनो । खाने का असल तरीक़ा ये है कि सबसे पहले हलाल की रोज़ी होनी चाहिए । अगर ग़िज़ा में हराम की आमेज़िश (मिलावट) हो जाये तो जो आदाब तुमने बयान किए, उनके बरतने से कोई फ़ायदा न होगा और दिल रोशन होने के बजाय और तारीक (अंधेरा) हो जाएगा ।" शेख़ जुनैद ने बेसाख़्ता कहा:
"जज़ाकल्लाह ।" (अल्लाह तुम्हारा भला करे)

फिर बहलोल ने बताया: "गुफ़्तगु करते वक़्त सबसे पहले दिल का पाक और नीयत का साफ़ होना ज़रूरी है और इसका भी ख़्याल रहे कि जो बात कही जाये, अल्लाह की रजामंदी के लिए हो । अगर कोई ग़रज़ या दुनियावी मतलब का लगाओ या बात फ़ुज़ूल किस्म की होगी तो ख़ाह कितने ही अच्छे अल्फ़ाज़ में कही जाएगी, तुम्हारे लिए वबाल बन जाएगी, इसलिए ऐसे कलाम से ख़ामोशी बेहतर है ।"

फिर सोने के मुताल्लिक़ बताया: "इसी तरह सोने से मुताल्लिक़ जो कुछ तुमने कहा वो भी असल मक़सूद नहीं है । असल बात ये है कि जब तुम सोने लगो तो तुम्हारा दिल बुग्ज़, कीना और हसद से ख़ाली हो । तुम्हारे दिल में दुनिया और माल-ए-दुनिया की मुहब्बत न हो और नींद आने तक अल्लाह के ज़िक्र में मशग़ूल रहो ।"

बहलोल की बात ख़त्म होते ही हज़रत जुनैद बग़्दादी ने उनके हाथों को बोसा दिया और उनके लिए दुआ की । शेख़ जुनैद के मुरीद ये मंज़र देखकर हैरान रह गए । उन्हें अपनी ग़लती का एहसास हुआ और ये बात उनकी समझ में आ गई कि हर शख़्स को चाहिए कि वो जो बात न जानता हो उसे सीखने में ज़रा भी न शरमाए ।।

Related Islamic Stories:

Mafhoom-e-Hadees:
Abu Huraira Razi’Allahu Anhu) Se Riwayat Hai Ke, Rasool’Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Farmaya, "Jis Rozedaar Ko Khud-Ba-Khud Qay(Ulti yani vomit) Aaye Iss Par Qaza Nahi Hai Albatta Jo (Jaan Boojh Ker) Qay Karey Woh Qaza Rozey Rakhey.”
– (Abu Dawood, Ibn-e-Maaja)

Related Short Hadees:

Shehzadi E Rasool ﷺ Syeda Fatima Zahra Radi Allahu Anha biography in Roman Urdu Hindi


Biography, Syeda Fatima Zahra biography, fatima name meaning in urdu, fatima zahra wiladat, hazrat bibi fatima life story and lifestyle, seerat fatima zahra in urdu, hazrat fatima ki zindagi in hindi, islam, brief history of islam
Naam: Syeda Fatima Zahra Radiyallahu Anha Bint Hazrat Muhammad ﷺ
Youm E Wiladat: 20th Jamadi Ul Aakhir (Jamadi Ul Thani)
Youm E Wisal: 3rd Ramzan ul Mubarak

Ummul Mominin Hazrat Sayyeda Khadijatul Kubra Radiyallahu Anha Farmati He Ke “Jab Sayyeda Fatima Zahra Radiyallahu Anha Mere Shiqame Paak Me Jalwagar Hui To Mujhe Kisi Qism Ki Giraani Mehsoos Nahi Hoti Thi Balke Sayyeda Fatima Radiyallahu Anha Mujhse Baate Kiya Karti Thi.”

Sahibe ‘Rouzatul Vaaizin’ Likhte He Ke Jab Sayyeda Fatima Zahra Radiyallahu Anha Apni Vaalida Majida Hazrat Sayyeda Khadijatul Kubra Radiyallahu Anha Ke Shiqame Paak Me Jalwa Farma Hui To Huzur Sayyed E Aalam Sallallahu Alayhi Va Sallam Ne Sayyeda Khadijatul Kubra Radiyallahu Anha Se Farmaya Ke, “Ae Khadija (Radiyallahu Anha) ! Mujhko Roohul Amin Alayhissalam Ne Khabar Di He Ke Tumhare Shiqam Me Jo Sahabzaadi He Jab Ye Paida Ho Unka Naam ‘Faatima’ Rakha Jaae, Ke Ye Unka Nasli Naam He”. Fatima Ke Mana He “Paak, Paakiza, Ba Barkat, Bahot Khush Akhlaaq.”

Hazrat Anas Radiyallahu Anhu Farmate He Ke Huzur Sallallahu Alayhi Va Sallam Ne Farmaya Ke “Mene Apni Is Beti Ka Naam Fatima Is Liye Rakha He Ke Allah Ta’ala Ne Meri Is Beti Aur Is Se Mohabbat Rakhne Walo Ko Jahannam Se Aazad Farmaya He.”

Aapke Alqabaat Ki Mukhtasar Tashrih :-
Zahra:
Zahra Ke Mana He ‘Kali’, ‘Nihayat Khubsurat’
Allah Tabarak Va Ta’ala Ne Aapko Bahot Hi Zyada Husn O Jamal Ataa Farmaya Tha. Chunanche Hazrat Anas Bin Maalik Radiyallahu Anhu Farmate He Ke “Mene Apni Vaalida Majida Se Hazrat Sayyeda Fatima Zahra Radiyallahu Anha Ke Muta’alliq Puchha To Farmaya Ke” “Sayyeda Fatima (Radiyallahu Anha) Choudhvi Raat Ke Chand Ki Tarah Hasin O Jamil Thi”

Batool:
Batool Ke Mana He ‘Duniya Se Be Ta’alluq’
Chunke Aapki Tavajjoh Duniya Aur Uski Aisho Ishrat Ki Taraf Nahi Thi Balke Har Waqt Allah Tabarak Va Ta’ala Ki Taraf Rahi He. Is Liye Aapko Batool Kehte He.

Taahira Va Zaakiya:
Taahira Va Zaakiya Ka Mana He ‘Paak Saaf’
Chunke Bachpan Hi Se Huzur Sallallahu Alayhi Va Sallam Ki Nazre Rehmat Aur Faizane Mohabbat Se Aapke Batin Ka Tazkiya Ho Chukka Tha Aur Aapko Zaahiri Va Batini Taharat Va Paakizgi Hasil Ho Chuki Thi. Is Liye Aapka Laqab Taahira Va Zaakiya Hua.

Raaziya Va Marziya:
Chunke Aap Har Waqt Allah Ta’ala Ki Raza Par Raazi Rehti Thi, Is Liye Aapko Raaziya Marziya Kehte He.

Aabida Va Zaahida:
Chunke Aapki Puri Zindagi Zohdo Ibadat Me Guzri, Isliye Aapko Zaahida Va Aabida Ke Laqab Se Yaad Kiya Jata He.

Bibi Fatimah Zahra Radiallahu Anha Ke Bare Me Hazrat Muhammad ﷺ Ka Farman:
Hazrat Zaaadan Radiyallahu Anhu Hazrat Suleman Radi allahu Anhu Se Rivayat Karte He Ke Allah Ke Pyare Habib Sallallahu Alayhi Va Sallam Ne Farmaya “Ae Suleman ! Yaad Rakho…”

Jo Koi Meri Beti Fatima Se Mohabbat Rakhega Bahisht Me Mere Sath Hoga Aur Jo Koi Uske Sath Dushmani Rakhega Wo Jahannam Me Jaaega.

Ae Suleman ! Meri Beti Fatima Ki Mohabbat 100 Jagah Nafaa Pahonchati He Un Jagaho Me Sahal (Aasaan) Maqamat Mout Aur Qabr Aur Mizaan Ur Pul Siraat Aur Hisaabe Qayamat He.

Jis Shakhs Se Meri Beti Fatima Khush Hogi Us Se Me Khush Hunga, Allah Ta’ala Bhi Us Se Khush Hoga Aur Jis Kisi Se Meri Beti Faatima Naraz Hogi Us Se Me Naaraz Hunga Aur Jis Se Me Naaraz Hu Allah Bhi Us Se Naaraz Aur Gazabnaak He.

Ae Suleman ! Aur Jo Shakhs Meri Beti Aur Uske Shohar Par Zulm Kare Ya Unki Aulad Par Zulm Kare Uske Liye Vel He, Halaakat Hi Halaakat He.
[Tazkira Sayyeda Khatoone Jannat]

Related Islamic Biography:

Ramadan Mubarak Quotes 2018: Many People Look For Ramadan Quotes Near The Month Of Ramadan. And If You Are Also Looking For The Best Ramadan Quotes Then This Article Will Satisfy You. This Article Covers All The Quotes About Ramadan Including The Ramadan Mubarak Quotes In Urdu, Ramadan Mubarak Quotes In English And Ramadan Mubarak Quotes In Hindi. If You Want Ramadan Mubarak Quotes In Arabic Then Let Us Know In The Remarks/Comments. Also, You Will Also Find Ramadan Quotes Images In This Article.

Some People Refer To These Ramzan Mubarak Quotes As Ramadan Quotes, Ramzan Ki Fazilat or Shan E Ramzan.

Hadees Sharif:
Hazrat Muhammad Mustafa Sallallahu Alaihi Wasallam Ne Farmaya, "Teen(3) Aadmiyon Ki Dua Radd Nahi Ki Jaati (1) Aadil Hukmaraan (2) Rozedaar Hatta Ke Roza Iftar Karle Aur (3) Mazloom.
[Tirmizi 3598, Hadees Hasan]

Hadees Sharif:
Jannat Mein 8 Darwaze Hain Unme Ek Darwaze Ka Naam Raiyyan Hai, Us Darwaze Se Wahi Jannat Mein Jayega Jo Roza Rakhte Hain.
[Sahih Al Bukhari Shareef, Jild-1, Safa-394, Hadees-3257]

Hadees Sharif:
Jisne Allah Ki Riza Ke Liye Ek Din Ka Roza Rakha Allah Paak Use Jahannam Se Itna Door Kar Dega Jaise Kawwa Jab Bachcha Tha Us Waqt Se Udta Raha Yahan Tak Ki Budha Ho Kar Mara.
[Musnad Imam Ahmad Bin Hambal, Hadees 619]
Note: Kawwa Bahot Lambi Umr Paata Hai 100 Saal Tak Ya Usse Ziyadah, To Wo Apni Umr Me Jitna Udta Hai Bachpan Se Budhape Tak Utne Fasle Par Allah Rozedar Se Jahannam Ko Door Farma Dega.

Hadith:
Ye Mahina (Ramzan Sharif) Sabr Aur Bhalai Ka Hai Aur Sabr Ka Sawab Jannat Hai Aur Is Me Momin Ka Rizq Badha Diya Jata Hai.
[Sahih Ibn-E-Khuzaima 3/1887]

Hadith:
Roza Aur Quran Bande Ki Shafa’at Karenge, Roza Kahega Aye Rab Mai Ne Ise Khane Aur Khwahishon Se Ise Din Me Rok Diya, Meri Shafa’at Iske Haq Me Qubool Farma, Quran Kahega Aye Rab Mai Ne Ise Raat Me Sone Se Baaz Rakha Meri Shafa’at Iske Haq Me Qubool Farma Dono Ki Shafa’aten Qubool Hogi.
[Musnad, Imam Ahmed bin Hanbal, Jild-2, Safa-586]

Hadith:
Roze Ke 3 Darje Hain,
1-Aam Logo Ka Roza Ke Yahi Pet Aur Sharmgah Khane Pine Aur Jima Se Rokna.
2-Khas Logo Ka Roza Kaan Aankh Zuban Aur Hath Paon Tamam Aazaye Jism Ko Gunaho Se Baaz Rakhna.
3-Khasul Khas Logo Ka Roza Ki Allah Ke Siwa Apne Ko Sab Se Juda Karna Aur Apni Tamam Tawajjoh Ko Sirf Allah Ki Taraf Lagana.
[Bahar-E-Shariat, Hissa-5, Page-966]

Roza Ke Masail:
Mafhoom-e-Hadees:
Abu Huraira Razi’Allahu Anhu) Se Riwayat Hai Ke, Rasool’Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Farmaya, "Jis Rozedaar Ko Khud-Ba-Khud Qay(Ulti yani vomit) Aaye Iss Par Qaza Nahi Hai Albatta Jo (Jaan Boojh Ker) Qay Karey Woh Qaza Rozey Rakhey.”
[Abu Dawood, Ibn-e-Maja]

Hazrat Abu Bakr Siddique RaziAllahu Anhu Ki Zindagi Aur Martaba | Biography In Roman Urdu


Laqab: Siddiq e Akbar, Gaare Yaare Nabi, Afzalun Naas Ba’adal Ambiya, Saani Isnain, Khalifatul-Rasool, Ateeq.

Hazrat Abu Bakr Siddiq Radiallahu Anhu Ki Wiladat (Birth):
– Aap Ki Wiladat Mubarak 573 C.A. Me Makka Me Hui. Aap Ke Waalid Ka Naam Usman Abu Quhafa Ibn Amir Aur Waalida Ka Naam Salma Bint Sakhar (Ummul Khair) Hai.
– Aap Quraish Ke Banu Taym Kabeele Se Ta’aaluq Rakhte Hain. Aap Ka Asl Naam Abdullah Hai.

Deen Ki Daawat:
Aap Ki Daawat Aur Mashware Se Bahut Saare Log Islam Me Dakhil Hue, Jin Me Hazrat Usman-Ibn-Affan, Zubair-Ibn-Awwam, Talha-Ibn-Ubaidullah, Abdur-Rehman-Bin-Awf, Sa’ad-Ibn-Abi-Waqqas, Abu-Ubaidah-Ibn-Jarrah, Abdullah-Bin-Abdul-Asad (Abu Salama), Khalid-Ibn-Sa’id Aur Abu-Huzifah-Ibn-Mughirah (Razi’Allahu Anhuma) Mashhoor Hain.
– Aap Ne 8 Gulamo Ko Aazad Karaya Jo Musalman Ho Gaye They. Jin Me Mardo Me Hazrate Bilal-Habashi-Ibn-Ribah, Abu-Fakih, Ammar-Ibn-Yasir Aur Abu-Fuhaira Aur Aurto Me Lubainah, Nahdiah, Umm Ubais, Harisah Bint Muammil Shamil Hain. Is Ke Liye Aap Ne 40,000 Dinar Kharch Kiye.
– Aap Ke Waalid Ne Kaha ‘Tum Budhe Aur Kamzor Gulamo Ko Aazad Karate Ho Jis Se Hame Koi Faida Nahi Hoga.’
– Aap Ne Farmaya ‘Main Tou Allah Ki Raza Ke Liye Musalmano Ko Aazad Karata Hu.’

Siddique Akbar Ka Laqab:
12 Nabawi (621 C.A.) Me Me’araj Ke Baad Huzoor (Sallallahu Alaihi Wasallam) Ashaba Ko Me’araj Ki Baaten Bayan Kar Rahe They.
– Hazrat e Abu Bakr (Razi’Allahu Anhu) Thoda Der Se Aaye.
– Aap Aakar Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ke Qareeb Jaakar Bethe.
– Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Phir Se Shuru Se Pura Bayan Shuru Kiya.
– Aur Hazrat e Abu Bakr (Razi’Allahu Anhu) Har Baat Par Farmate ‘Sadaqata Ya Rasool’Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam).’
* Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Khush Hokar Aap Ko ‘Siddique Akbar’ Ka Laqab Ata Farmaya Yaa’ni Tamam Siddique Me Sab Se Bada.
[ads-post]
Aap Ke Baare Me Huzoor Ka Farman:
– Aap Ke Baare Me Pyare Aaqa (Sallallahu Alaihay Wasallam) Farmate Hain Ke,
(1) Abu Bakr ‘Afzalul Bashar Ba’adal Ambiya’ Hain Ya’ni ‘Ambiya Ke Baad Tamaam Insan Me Sab Se Afzal.’

(2) Agar Abu Bakr Ka Emaan Meri Tamam Ummat Ke Emaan Ke Saath Wazan Me Kiya Jaaye Tou Abu Bakr Ka Emaan Gaalib Aaye.

(3) Hazrate Abu Bakr Ka Ye Martaba Sirf Uski Ibadaat Ki Wajah Se Nahi Hai, Balke Allah Ta’ala Ne Uske Dil Me Jo Khas Rakha Hai Uski Wajah Se Hai.

(4) Abu Bakr Ke Mujh Par Bahut Ehsaan Hain. Uss Ne Islam Ke Liye Apni Jaan Aur Maal Bhi Qurban Kiye Hain Aur Apni Beti Mere Nikah Me Di Hai Aur Abu Bakr Ne Hazrat Bilal Habsi Ko Aazad Karaya Hai.’

Aap Ashra-e-Mubashara Me Se Hain.:
(1) Ek Baar Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Aap Se Farmaya ‘Abu Bakr, Jannat Me Dakhil Hone Walo Me Tum Sab Se Pehle Rahoge.’

(2) Ek Baar Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Farmaya ‘Jab Allah Ta’ala Kisi Mo’min Ke Liye Bhalai Ka Irada Karta Hai To Uss Me Koi Khaslat Paida Farmata Hai Jis Ke Sabab Wo Jannati Ban Jaata Hai Aur Aisi 360 Khaslate Hain.’ Hazrate Abu Baqr Ne Puchha ‘Ya Rasool Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam), Kya Mujh Me Aisi Koi Khaslat Hai?’ Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Farmaya – ‘Abu Bakr, Tumhe Mubarak Ho Ke Tum Me Wo Tamam Khaslat Maujood Hai.’

Ameer Ul Hujjaj:
9 Hijri Me Jab Hajj Farz Hua To Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Aap Ko Ameer ul Hujjaj Banakar Ashaba Ko Aap Ke Saath Hajj Ke Liye Bheja.

Aap Ki Mohabbat Nabi-e-Paak Ke Liye:
hazrat abu bakr siddiq ra biography in roman urdu, hazrat abu bakr siddique ki zindagi, abu bakr siddiq family name, hazrat abu bakar siddique ki wafat, Biography, abu bakr siddiq quotes, naqshbandi silsila,
10 Hijri Me Hajjatul Wida Ke Mauqe Par Bhi Rasool’Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ke Saath Rahe. Jab Ye Aayat Naazil Hui ‘Aaj Ke Din Ham Ne Tumhare Liye Tumhara Deen Mukammal Kar Diya Aur Tumhare Liye Deene Islam Pasand Kiya.’ Tou Ashaba Khush Hue Ke Allah Ta’ala Ne Deene Islam Ko Mukammal Kar Diya. Magar Aap Gamzada Ho Gaye. Jab Puchha Gaya Tou Farmaya Ke ‘Ye Sahi Hai Ke Deene Islam Ko Allah Ta’ala Ne Mukammal Kar Diya Hai. Magar Deen Mukammal Hone Ke Baad Mumkin Hai Ke Huzoor (Sallallahu Alaihi Wasallam) Ham Se Anqareeb Parda(Rukhsat/Wafat) Farmayenge. Main Ye Sochkar Gamzada Hu.’

Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ke Wafat Ke Baad Sab Ashaba Gamzada They Aur Hazrate Umar Farooq (Razi’Allahu Anhu) Ne Tou Farma Diya Tha Ke – ‘Agar Kisi Ne Mere Saamne Ye Kaha Ke Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ka Inteqal Ho Gaya Hai Aur Aap (Sallallahu Alaihay Wasallam) Hamare Darmiyan Me Nahi Hain Tou Mai Talwar Se Uski Gardan Kalam Kar Dunga.’

– Aise Maahol Me Sab Khamosh They Tab Hazrate Abu Baqr Uthkar Aage Aaye Aur Khutba Padhne Ke Baad Ashaba Se Farmaya: ‘Agar Koi Muhmmad (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ki Parastish Karta Ho Tou Wo Jaan Jaaye Ke Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Inteqal Kar Gaye Hain
Aur Jo Rabbe Muhammad (Yaani Allah) Ki Ibadat Karta Ho Tou Wo Jaan Le Ke Allah Zinda Hai Aur Kabhi Marne Wala Nahi.’

Aap Islam Ke Pahle Khaifa Rahe:
– Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ke Parda Farmane Ke Baad Hazrat e Umar Farooq (Razi’Allahu Anhu) Ke Mashware Par Aap Ko Khalifa Banaya Gaya.
– Aap 13 Rabi-Ul-Awwal 11 Hijri (8 June 632 C.A.) Ko Sab Se Pehle Khalifa Hue.
– Aap Ka Daure Khilafat 2 Saal 4 Maah Ka Raha.

Quraan-e-Kareem Ki Hifazat:
11 Hijri (632 C.A.) Me Jange Yamama Me Taqreeban 70 Ashaba Shaheed Hue Jo Hafiz e Qur’an They. Hazrate Umar Farooq (Razi’Allahu Anhu) Ne Aap Se Farmaya ‘Iss Tarah Hafiz e Quran Kum Hote Rahe To Qur’an Ki Hifazat Karna Mushkil Hoga. Behtar Hai Ke Ham Qur’an Ko Jama Karke Kitaab Bana Len.’

– Iss Tarah Hazrate Umar Farooq (RaziAllahu Anhu) Ke Mashware Se Qur’an Majeed Ko Jama Karke Kitaab Banane Ka Kaam Shuru Kiya Gaya, Jo Hazrate Usman Ghani Ke Zamane Me Mukammal Hua.

Aapka Pariwar (Hazrat Abu Bakr Siddiq Family): Aap Ki 4 Biwiya, 3 Bete Aur 3 Betiya Hain. 
(1) Qutaylah Bint Abd-Al-Uzza Se 1 Beta –Abdullah Aur 1 Beti – Asma
(2) Umme Rumman Se 1 Bata – Abdur Rehman Aur 1 Beti – Aaisha
(3) Asma Bint Umays Se 1 Beta – Muhammad
(4) Habibah Bint Kharijah Se 1 Beti – Umme Kulsum
Sirf Aap Hi Aise Sahabi Hain Jinke Waliden Aur Aulaad Bhi Ashaba Hain.

Aap Nabi-e-Paak Ke Sabse Qareebi Dost Hai:
– Aap ‘Gare Yaare Nabi’ Hain Yaani Nabi-e-Paak (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ke Sab Se Qareebi Dost.
– Aap Ko Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Har Khaas Mauqe Par Aur Mehfil Me Saath Aur Qareeb Rakha.
– Hijrat Me Bhi Pyare Aaqa (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Sirf Aap Ko Saath Liya.

Wisaal (Hazrat Abu Bakar Siddique Ki Wafat):
Aap Ka Wisaal 22 Jamadil Akhir 13 Hijri 23 August 634 C.A. Ko 63 Baras Ki Umr Me Madina Me Hua. Aap Ki Namaze Janaza Hazrat Umar Farooq (RaziAllah Anhu) Ne Padhai. Aap Ko Roza-e-Rasool Me Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ke Bagal Me Dafn Kiya Gaya Hai.

Allah Rabbul Izzat Se Dua Hai Ke
Allah Hum Tamam Ko Hidayat Ata Farmaye,..
Hume Sirate Mustakim Par Chalaye,…
Jab Tak Hume Zinda Rakhey Islam Aur Imaan Par Zinda Rakhye…
Khatma Humara Imaan Par Ho…
!!! Wa Akhiru Dawana Anilhamdulillahe Rabbil A’lameen !!!

Note: Likhne Me Koi Khata Hui Ho Tou Jarur Ba-Daleel Hamari Islah Kare… !!!!
Dua Ki Darkhwast !!!!

Related Islamic Biography:

Baroze Qayamat Maaldar Log Miskino Par Rashk Karenge | Hadees Sharif | Hadtih Message | Islamic SMS


Mafhoom-e-Hadees: 
Rasool’Allah ﷺ Farmate Hai Ke, “Jab Baroze-Qayamat Ahle Balaa (Yaani Duniya Me Bimaariya, Pareshaniya Uthanewaley) Ko Sawaab Ata Kiya Jayega Tou Aafiyat Wale (Maaldar Aur Duniya Me Khus Rehnewale Log) Tamanna Karenge, Kaash ! Duniya Me Hamaari Khaale Kechiyon Se Kaati Jaati. (Tou Aaj Hume Bhi Azimusshan Sawaab Milta)”.
[Sunan Tirmizi Jild:4 Hadith no.2410]

Related Hadith Quotes:

Contact Form

Name

Email *

Message *