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हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे लिरिक्स हिंदी में / Hum Apne Nabi Pak Se Yun Pyar Karenge Lyrics in Hindi


मरहबा मरहबा मरहबा मुस्तफ़ा
मरहबा मरहबा मरहबा मुस्तफ़ा

हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे
हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे

जश्ने-विलादत की रोनक़ पे यारों
मरते हैं सुन्नी मरते रहेंगे
अपने नबी की अज़मत का चर्चा
करते हैं सुन्नी करते रहेंगे

कुछ जलने वाले देख के केहते हैं हमेशा
सरकार की आमद पे लगाते हो क्यूँ पैसा
ये पैसा तो क्या चीज़ है हम घर भी लुटादें
कोई नहीं जहां में सरकार के जैसा

हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे
हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे

मेरे सरकार आए, मेरे दिलदार आए
मेरे सरकार आए, मेरे दिलदार आए

मेरे नबी आ गए मरहबा या मुस्तफ़ा
प्यारे नबी आ गए मरहबा या मुस्तफ़ा
लजपाल नबी आ गए मरहबा या मुस्तफ़ा
ग़मख़्वार नबी आ गए मरहबा या मुस्तफ़ा

साहिबे-मेअराज नबी
आसियों की लाज नबी
नबीयों के सरताज नबी
कल भी थे और आज नबी
दो जहाँ के राज वाले मेरे नबी आ गए

हर ख़ारजी फसादी वतन से भगाएंगे
पढ़ के दुरूद सब को मीलादि बनाएंगे
लाएंगे हम हुज़ूर का इस्लाम तख़्त पर
ला दीनियत के सारे बुतों को गिराएंगे

हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे
हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे

तकलीफ होती है तुझे मिर्चें भी लगती हैं
जब बारह्वी पे लाइटों से गलियां भी सजती हैं
क्यूँ चिड़ता है तू देख के झंडों की बहारें
ताज़िमे-नबी हो तो सभी अच्छी लगती हैं

हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे
हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे

निसार तेरी चहल-पहल पर, हज़ारों ईदें रबीउल-अव्वल
सिवाए-इब्लीस के जहाँ में सभी तो ख़ुशियाँ मना रहे हैं

लालच न दो, हम नामे-मुहम्मद पे मरेंगे
मीलाद पे समझौता किया है न करेंगे
बर्दाश्त ना करेंगे जुलूसों पे रुकावट
मिलादे-मुहम्मद का मिशन जारी रखेंगे

हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे
हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे

तेरा खावां में तेरे गीत गावां या रसूलल्लाह
तेरा मीलाद मैं क्यूँ ना मनावां या रसूलल्लाह

तालीम पेहले दूंगा मुहम्मद के जश्न की
तेहज़ीब सिखाऊंगा मुहम्मद के जश्न की
विरसे मे छोड़ जाऊंगा मीलाद की लगन
मेरे भी बच्चे जश्ने-विलादत मनाएंगे

हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे
हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे

मेरे नबी आ गए मरहबा या मुस्तफ़ा
प्यारे नबी आ गए मरहबा या मुस्तफ़ा
लजपाल नबी आ गए मरहबा या मुस्तफ़ा
ग़मख़्वार नबी आ गए मरहबा या मुस्तफ़ा

हम अपनी मुहब्बत का यूँ ऐलान करेंगे
हम जश्ने-मुहम्मद पे फ़िदा जान करेंगे
मीलाद की रैलियो-जुलूसों में ले जाकर
औलाद भी सरकार पे क़ुर्बान करेंगे

हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे
हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे

क़ीमत जहाँ में अपनी उजागर गिराओगे
आक़ा को छोड़ कर कभी इज़्ज़त न पाओगे
मज़बूत करलो रिश्ता नबी से तो जियोगे
रिश्ता नबी से तोड़ोगे तो टूट जाओगे

हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे
हर हाल में सरकार का मीलाद करेंगे

साहिबे-मेअराज नबी
आसियों की लाज नबी
नबीयों के सरताज नबी
कल भी थे और आज नबी
दो जहाँ के राज वाले मेरे नबी आ गए

नात लिरिक्स (बोल): हम अपने नबी पाक से यूँ प्यार करेंगे लिरिक्स हिंदी में
नात ख़्वां: हाफिज ताहिर कादरी और मोहम्मद अहसान कादरी

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Apni Nisbat Se Mein Kuch Nahi Hoon Lyrics


Apni Nisbat Se Mein Kuch Nahi Hoon
Iss Karam Ki Badolat Badha Hoon
Unke Tukdon Se Ezaz Paa Kar
Tajdaro Ki Saf Mein Khada Hoon

Iss Karam Ko Magar Kya Kaho Gay
Maine Maana Mein Sab Se Bura Hoon
Jo Buroon Ko Samaite Huwe Hain
Unke Qadmon Mein Bhi Pada Hoon

Dekhne Walo Mujhko Na Dekho
Dekhna Hai Agar To Yeh Dekho
Kiske Daaman Se Waabasta Hoon Mein
Kon Waali Hai Kiska Gadaa Hoon

Dekhta Hoon Jab Unki Ataaein
Bhool Jata Hoon Apni Khataaein
Sir Nadaamat Say Uthta Nahi Hai
Jab Mein Apni Taraf Dekhta Hoon

Ya Nabi Apne Gham Ki Kahaani
Keh Sakoonga Na Apni Zubaani
Bin Kahe Hi Meri Laaj Rakh Lo
Mein Sisakti Hui Ilteja Hoon

Shaaf E Mugnibaa Ke Karam Ne
Laaj Rakh Li Mere Khote Pan Ki
Nisbaton Ka Karam Hai Yeh Khalid
Khotha Hote Huwe Bhi Khara Hoon

Apni Nisbat Se Mein Kuch Nahi Hu
Is Karam Ki Badaulat Badha Hoon
Unke Tukdon Se Ezaz Paa Kar
Tajdaro Ki Saf Mein Khada Hoon

(Sallallahu Alaihi Wasallam)

Naat Lyrics: Apni Nisbat Se Mein Kuch Nahi Hoon Lyrics
Naat Khawan: Owais Raza Qadri

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بسم الله الرحمن الرحيم

Chori Ka Maal Kharidne Walo Ke Liye Shariyat Ka Hukm:


Mas'ala:
Alahazrat Imam Ahmad Raza Rahimahullah Farmate Hain, "Chori Ka Maal Danistah (Ilm Hote Huve) Khareedna Haraam Hai, Bakle Agar Zan (Us Ke Chori Ka Hone Ka Gumaan) Ho Jab Bhi Haraam Hai, Phir (Khareedne Ke Bad) Agar Maloom Ho Jaye Ke Yah Chori Ka Maal Hai To Uska Istimaal Karna Haraam Hai, Balke Maalik Ko Diya Jaaye Aur Vah Na Ho To Us Ke Vaarison Ko, Aur Un Ka Pata Bhi Na Chal Sake To Faqeeron Ko Dediya Jaye."
[Imam Ahmad Raza Aur Radde Bidaat Va Munkaraat 2/347]
[Fatawa Razvia Qadeem (7)]

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